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Bhagwat Geeta in Hindi PDF Download 2023 संपूर्ण श्रीमद्भगवद्गीता पीडीएफ

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Bhagwat Geeta in Hindi PDF Download: Bhagwat Geeta Kisne likhi? Bhagwat Geeta book Price कितना है? Shrimad Bhagwat Geeta pdf और Bhagwat Geeta Shlok With Meaning in Hindi PDF कैसे प्राप्त करें? अगर आप इन सब प्रश्नों के साथ इंटरनेट पर कंटेंट खोज रहे हैं तो आप बिल्कुल सही वेबसाइट (dayadtech.com) पर आये हैं इस लेख में संपूर्ण श्रीमद्भगवद्गीता पीडीएफ डाउनलोड करने पर जोर दिया गया है। ब्रह्मसूत्र, उपनिषद् और श्रीमद्भगवद्गीता वेदान्त के तीन स्तम्भ माने जाते हैं, अर्थात Bhagwat Geeta (श्रीमद्भगवद्गीता) भारतीय साहित्य का एक महत्वपूर्ण और प्रमुख ग्रंथ है।

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Bhagwat Geeta in Hindi PDF Download

इस पवित्र पुस्तक को योगशास्त्र, ब्रह्मविद्या और धार्मिक तत्त्वों का आध्यात्मिक महाग्रंथ माना जाता है। भगवान श्रीकृष्ण और अर्जुन के बीच हुए एक संवाद के रूप में प्रस्तुत इस पुस्तक में ज्ञान की अमूल्य बातें शामिल है। इस पुस्तक में अनेकों जीवन के महत्वपूर्ण संदेशों को सम्मिलित किया गया है जो किसी व्यक्ति द्वारा श्रीमद्भगवद्गीता को अपने जीवन में उतारने पर जीवन जीने का सही मतलब समझ में आता है। dayadtech के द्वारा लिखे गए इस लेख में मैं आपको Bhagwat Geeta PDF सभी भाषाओँ में प्रदान करने का वादा करता हूँ।

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bhagwat geeta katha विवरण

श्रीमद्भगवद्गीता” एक ऐसा ग्रंथ है जिसमें शब्दिक चर्चा या सैद्धांतिक ज्ञान से अधिक एक योद्धा के लिए कहे गए शब्द हैं। भगवद गीता का जन्म कुरुक्षेत्र के मैदान में हुआ था, जहाँ अर्जुन के सामने एक तरफ परिवार-रिश्तेदार और धर्म तथा दूसरी ओर गुरुजनों का मोह माया था।

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अर्जुन के लिए यह निर्णय लेना बहुत ही कठिन था की वह किसका चुनाव करे? वह एक जीवन से भोग-विलास आदि से बहुत दूर रहने वाला शिष्य नहीं था जो पूरी दुनिया या सृष्टि का मोह छोड़कर कृष्ण के पास आया हो। वह युद्ध के मैदान में खड़ा था और अपने लिए सही निर्णय लेना चाहता था।

अर्जुन ने धर्म की जगह अज्ञान, भ्रम और स्वार्थ को चुना। वह एक दुराग्रही शिष्य था जो सुनने को तैयार नहीं था, क्योंकि उसका मन भी एक साधारण अर्थात जिसमें कोई विशेषता न हो वाला मन ही था, और अपनों पर दुःख, क्लेश बढ़ाना उसके लिए आसान नहीं था।

Bhagwat Geeta in Hindi PDF” के अठारह अध्यायों में श्रीकृष्ण ने हठीला अर्जुन को मनाने का प्रयास किया है। हम इंसानों की भी स्थिति अर्जुन से अलग नहीं है। हमारे जीवन में भी ऐसे क्षण आते हैं जब निर्णय लेना आसान नहीं होता।

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ऐसे में यदि हमें कृष्ण का सहारा नहीं मिलता है, तो हम जीवन के इस कुरुक्षेत्र में हार जाते हैं, क्योंकि भगवान् कृष्ण के बिना जीतना असंभव सा है। dayadtech की यह Shrimad Bhagwat Geeta PDF और Bhagwat Geeta Book in Hindi” आपके लिए लेख लिखी की गई है, ताकि आप सभी के जीवन में कृष्ण का संग मिल सके।

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यहां श्रीमद्भगवद्गीता के 18 अध्यायों की सूची है दी गयी है जिनमें 700 श्लोक हैं जो निम्न प्रकार से हैं।

अध्यायशीर्षकश्लोक
प्रथमअर्जुनविषाद योग47
द्वितीयसांख्य योग72
तृतीयकर्म योग43
चतुर्थज्ञान कर्म संन्यास योग42
पंचमकर्मसंन्यास योग29
षस्टआत्मसंयम योग47
सप्तमज्ञान विज्ञान योग30
अष्टमअक्षरब्रह्म योग28
नवमराजविद्या राजगुह्य योग34
दसमविभूति योग42
एकादशविश्वरूप दर्शन योग55
द्वादशभक्ति योग20
त्रयोदशक्षेत्र-क्षेत्रज्ञ विभाग योग34
चतुर्दशगुणत्रय विभाग योग27
पंचदशपुरुषोत्तम योग20
षोडसदैवासुरसम्पद्विभाग योग24
सप्तदशश्रद्धात्रय विभाग योग28
अष्टादशमोक्षसंन्यास योग78
18📝700

भगवद गीता में इन 18 अध्यायों के माध्यम से विभिन्न ज्ञान और धार्मिक सिद्धांतों की चर्चा की गई है जो सही मार्गदर्शन प्रदान करता है कि कोई भी व्यक्ति कैसे जीवन के मुख्य विचारणीय तथ्य के सामने खड़ा हो।

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महाभारत युद्ध के पहले ही श्रीकृष्ण ने अर्जुन को उपदेश दिया था जिसे “श्रीमद्भगवद्गीता” के नाम से जाना जाता है। इस ग्रंथ में श्रीकृष्ण ने अर्जुन को अपने सही कर्म और धर्म के बारे में सही ज्ञान दिया था। श्रीकृष्ण द्वारा अर्जुन को को दिए गए उपदेशों को “भगवत गीता” नामक पुस्तक में संकलित किया गया है। इस पुस्तक में 18 अध्याय और 700 श्लोक हैं।

Japji Sahib Path Hindi PDF

1. bhagwat geeta shlok

यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत:।
अभ्युत्थानमधर्मस्य तदात्मानं सृजाम्यहम्॥

📝 चतुर्थ अध्याय, श्लोक 7

इस श्लोक का हिंदी में अनुवाद है:

“हे भारत (अर्जुन)! जब-जब धर्म की हानि और अधर्म की अधिकता होती है, तब-तब मैं स्वयं को सृजाता हूं॥”

इसका अर्थ है की जब भी कभी भगवान को धर्म की रक्षा करने की आवश्यकता होती है, तो भगवान स्वयं अवतार लेते हैं ताकि धर्म की पुनर्स्थापना कर सकें।

“This verse from the Gita means that when the principles of righteousness and morality decline, and unrighteousness prevails, Lord Krishna manifests Himself in human form to restore and uphold the principles of righteousness and restore the balance in the world.”

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2. bhagwat geeta shlok

कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन।
मा कर्मफलहेतुर्भूर्मा ते सङ्गोऽस्त्वकर्मणि॥

📝द्वितीय अध्याय, श्लोक 47

इसका अर्थ है की तुम्हारा अधिकार सिर्फ सही कर्म पर ही है, लेकिन उस कर्म के फलों से कभी नहीं, इसलिए कर्म को फल के लिए मत करो और न ही काम करने में तुम्हारी लिप्तता हो।

This Bhagavad Gita phrase means that while people have control over their activities (karma), they do not have control over the results or rewards of those actions. As a result, one should avoid taking actions only to acquire particular rewards or benefits or to grow connected to the work itself. This line is regarded as one of the Bhagavad Gita’s most significant teachings and serves as the cornerstone of the Karmayoga school of thought, which emphasizes selfless effort without attachment to rewards.

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भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को महाभारत युद्ध के शुरू होने के पहले जो उपदेश दिया वह श्रीमद्भगवद्गीता के नाम से प्रसिद्ध हुआ। यह महाभारत के भीष्मपर्व का अंश है। भगवत गीता में 18 अध्याय और 700 श्लोक हैं। Shrimad Bhagwat Geeta वर्ष 2023 से लगभग 4500 वर्ष (2175 ई.पू.) पूर्व गीता का ज्ञान बोला गया था।

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भगवदगीता की गणना उनिषद् और ब्रह्मासूत्र में की जाती है, इस वजह से भारतीय परम्परा के अनुसार गीता का स्थान वही है जो हिंदू धर्म के महत्वपूर्ण श्रुति धर्म ग्रंथ जिनमें ब्रह्म और आत्मा आदि के स्वभाव और संबंध का बहुत ही दार्शनिक और ज्ञानपूर्वक वर्णन है और धर्मसूत्रों का है। उपनिषदों और गीता का सम्बन्ध गाय और उसके दुग्ध से जोड़ा गया है। अर्थात इसका तात्पर्य यह है कि उपनिषदों की जो आत्मज्ञान विद्या थी, उसको गीता संपूर्ण अंश में स्वीकार करती है।

गीता में उपनिषदों की अनेकों विद्याएँ शामिल हैं। जो निम्न प्रकार से है।

  • संसार के तुल्य के संबंध में अश्वत्थ विद्या
  • जिसका आदि या आरंभ न हो अजन्मा ब्रह्म के विषय में अव्ययपुरुष विद्या
  • परा प्रकृति या जीव के विषय में अक्षरपुरुष विद्या
  • और अपरा प्रकृति या भौतिक जगत के विषय में क्षरपुरुष विद्या।

अतः उपनिषदों के अध्यात्म और वेदों के ब्रह्मवाद, इन दोनों की युक्त जरूरी चीज गीता में शामिल किया गया है।

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FAQs — bhagwat geeta in hindi pDF

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